• ॐ श्री कुलान्त नाथाय नमः
    ॐ श्री ईशपुत्राय नम:
    ॐ सत्य सत्येंद्र नाथाय नम:
    -Yogini R Nath

    #ishaputra #wallpaper #MobilePhone #Mahasiddha #KaulantakPeeth #Himalaya #kulantPeeth
    ॐ श्री कुलान्त नाथाय नमः ॐ श्री ईशपुत्राय नम: ॐ सत्य सत्येंद्र नाथाय नम: -Yogini R Nath #ishaputra #wallpaper #MobilePhone #Mahasiddha #KaulantakPeeth #Himalaya #kulantPeeth
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  • 'Mahasiddha Ishaputra' wallpaper for Mobile phones
    -Yogini R Nath

    #ishaputra #wallpaper #MobilePhone #Mahasiddha #KaulantakPeeth #Himalaya #kulantPeeth
    'Mahasiddha Ishaputra' wallpaper for Mobile phones -Yogini R Nath #ishaputra #wallpaper #MobilePhone #Mahasiddha #KaulantakPeeth #Himalaya #kulantPeeth
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  • धधक रही है ज्वाला
    हाथों में ले कर भाला
    चहुँ ओर कलियुग काला
    ईशपुत्र भैरव तू जाग
    चीर अँधेरा कर उजियाला!
    धधक रही है ज्वाला
    धधक रही है ज्वाला

    रण के हाथी घोड़े छोड़
    विकृत हृदय के बंध तोड़
    मानव को झकझोर
    मचा धर्म का शोर
    हाहाकारी भैरव जाग
    कुचल विधर्मी नाग
    षड़यंत्रों को तोड़
    मृत्यु भय को छोड़
    किसी से न डर
    युद्ध कर युद्ध कर
    दबोच कलियुग काला
    धधक रही है ज्वाला
    हाथों में ले कर भाला
    चहुँ ओर कलियुग काला
    ईशपुत्र भैरव तू जाग
    चीर अँधेरा कर उजियाला!
    धधक रही है ज्वाला
    धधक रही है ज्वाला
    -Yogini R Nath

    #Ishaputra #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendraNath #IshaputraBhajan #HimalayanMahasiddha #SiddhaDharma #KulantNath #KaulantakNath #iloveishaputra #scrolllink
    धधक रही है ज्वाला हाथों में ले कर भाला चहुँ ओर कलियुग काला ईशपुत्र भैरव तू जाग चीर अँधेरा कर उजियाला! धधक रही है ज्वाला धधक रही है ज्वाला रण के हाथी घोड़े छोड़ विकृत हृदय के बंध तोड़ मानव को झकझोर मचा धर्म का शोर हाहाकारी भैरव जाग कुचल विधर्मी नाग षड़यंत्रों को तोड़ मृत्यु भय को छोड़ किसी से न डर युद्ध कर युद्ध कर दबोच कलियुग काला धधक रही है ज्वाला हाथों में ले कर भाला चहुँ ओर कलियुग काला ईशपुत्र भैरव तू जाग चीर अँधेरा कर उजियाला! धधक रही है ज्वाला धधक रही है ज्वाला -Yogini R Nath #Ishaputra #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendraNath #IshaputraBhajan #HimalayanMahasiddha #SiddhaDharma #KulantNath #KaulantakNath #iloveishaputra #scrolllink
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  • तोड़ कर घमंड वो, तप करे प्रचंड वो,
    रूप से है चण्ड जो, ईशपुत्र-ईशपुत्र!
    हिमालय है काम्पता, काल भी है हाँफता,
    पर्वत कदम से नापता, ईशपुत्र-ईशपुत्र!
    दिशाएं सनसना रही, प्रचंड शीत आ रही,
    श्वास भी कराह रही, ईशपुत्र-ईशपुत्र!

    कौन योगी है तू? कौन देवता?
    कौन विकट रूप है? मनुष्य बन के बैठा?
    तुझे कौन जानता है? कौन मानता?
    पुकारती है ये धरा,
    ईशपुत्र-ईशपुत्र! ईशपुत्र-ईशपुत्र!
    ईशपुत्र-ईशपुत्र! ईशपुत्र-ईशपुत्र!
    -Yogini R Nath

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    तोड़ कर घमंड वो, तप करे प्रचंड वो, रूप से है चण्ड जो, ईशपुत्र-ईशपुत्र! हिमालय है काम्पता, काल भी है हाँफता, पर्वत कदम से नापता, ईशपुत्र-ईशपुत्र! दिशाएं सनसना रही, प्रचंड शीत आ रही, श्वास भी कराह रही, ईशपुत्र-ईशपुत्र! कौन योगी है तू? कौन देवता? कौन विकट रूप है? मनुष्य बन के बैठा? तुझे कौन जानता है? कौन मानता? पुकारती है ये धरा, ईशपुत्र-ईशपुत्र! ईशपुत्र-ईशपुत्र! ईशपुत्र-ईशपुत्र! ईशपुत्र-ईशपुत्र! -Yogini R Nath #Ishaputra #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendraNath #IshaputraBhajan #HimalayanMahasiddha #SiddhaDharma #KulantNath #KaulantakNath #iloveishaputra #scrolllink
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  • तेरा नाम रटना ही भक्ति की युक्ति है,
    ईशपुत्र तेरा ध्यान ही तो मेरी मुक्ति है।

    दासी बना लो इन चरणों की मुझको,
    देती हूं दुहाई अब अपना लो मुझको,
    तेरे शब्दों में बसती अद्भुत शक्ति है,
    तेरा नाम रटना ही भक्ति की युक्ति है,
    ईशपुत्र तेरा ध्यान ही तो मेरी मुक्ति है।
    -Yogini R Nath

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    तेरा नाम रटना ही भक्ति की युक्ति है, ईशपुत्र तेरा ध्यान ही तो मेरी मुक्ति है। दासी बना लो इन चरणों की मुझको, देती हूं दुहाई अब अपना लो मुझको, तेरे शब्दों में बसती अद्भुत शक्ति है, तेरा नाम रटना ही भक्ति की युक्ति है, ईशपुत्र तेरा ध्यान ही तो मेरी मुक्ति है। -Yogini R Nath #Ishaputra #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendraNath #IshaputraBhajan #HimalayanMahasiddha #SiddhaDharma #KulantNath #KaulantakNath #iloveishaputra #scrolllink
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  • -Ishaputra Bhajan-
    जय ईशपुत्र पावन परम पवित्र,
    जय ईशपुत्र भगवन योगी चरित्र।
    -
    मुझ पर दया करो प्रभु जी,
    अपनी ही शरण में लो प्रभु जी,
    है दयालु कृपालु तुम्हारा चरित्र
    जय ईशपुत्र पावन परम पवित्र,
    जय ईशपुत्र भगवन योगी चरित्र।
    -Yogini R Nath

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    -Ishaputra Bhajan- जय ईशपुत्र पावन परम पवित्र, जय ईशपुत्र भगवन योगी चरित्र। - मुझ पर दया करो प्रभु जी, अपनी ही शरण में लो प्रभु जी, है दयालु कृपालु तुम्हारा चरित्र जय ईशपुत्र पावन परम पवित्र, जय ईशपुत्र भगवन योगी चरित्र। -Yogini R Nath #Ishaputra #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendraNath #IshaputraBhajan #HimalayanMahasiddha #SiddhaDharma #KulantNath #KaulantakNath #iloveishaputra #scrolllink
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  • आध्यात्मिक दीपावली — सिद्धों के अंतःप्रकाश की अनुभूति
    एक योगी के लिए, एक साधक के लिए, सच्ची दीपमाला अथवा वास्तविक दीपावली वह नहीं है जो बाहर दीपों से जगमगाती है,
    बल्कि वह है जो अंतःकरण में, चेतना के गहनतम स्तरों पर, भीतर के प्रकाश को जागृत करती है।
    जब साधक अपनी साधना में निरंतर स्थिर होता है,
    तो धीरे-धीरे उसकी सुषुम्ना नाड़ी में ऊर्जा का प्रवाह आरंभ होता है,
    और यह प्रवाह उसे सहस्रार कमल तक पहुँचा देता है —
    जहाँ एक हजार पंखुड़ियों वाला दिव्य कमल खिलता है।
    हमारा मस्तिष्क उसी सहस्रार का स्थूल प्रतिबिंब है —
    इसमें सूक्ष्म रूप से एक हजार बिंदु या पर्ण विद्यमान हैं,
    जिन्हें योगशास्त्र में “दीये समान बिंदु” कहा गया है।
    जब साधक गहन ध्यान और जागरूकता के माध्यम से इन सभी बिंदुओं को
    प्रकाशित कर देता है, तब उसका सम्पूर्ण चैतन्य उज्ज्वल हो उठता है —
    वही क्षण होता है उसकी असली दीपावली,
    जहाँ हर पर्ण एक दीपक बनकर भीतर के अंधकार को आलोकित करता है।
    सिद्धों के अनुभव में यह कहा गया है कि जब वे गहन ध्यानावस्था में प्रवेश करते हैं,
    और सुषुम्ना मार्ग से क्रमशः ऊपर उठते हुए ब्रह्मरंध्र (सहस्रार द्वार) तक पहुँचते हैं,
    तो वहाँ एक अलौकिक ज्योति, एक अनंत प्रकाश का सागर अनुभव होता है।
    उस अवस्था में उन्हें सम्पूर्ण ब्रह्मांड का दृश्य एक बिंदु में सिमटा हुआ प्रतीत होता है —
    सृष्टि की प्रत्येक ज्योति, प्रत्येक नक्षत्र, प्रत्येक तारा,
    जैसे किसी दिव्य दीपमाला के रूप में प्रकाशित हो रहा हो।
    वह अनुभव ही योगी की अंतर्यात्रा की दीपावली है —
    जहाँ भीतर का दीपक, ब्रह्मांड के दीपों से एकाकार हो जाता है।
    जिस प्रकार हमारे जीवन में दीपावली का उत्सव आती है —
    अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप में,
    उसी प्रकार यह ब्रह्मांडीय दीपावली निरंतर घटित हो रही है।
    यदि हम सूक्ष्म दृष्टि से देखें, तो यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड
    अनगिनत दीपों से आलोकित है —
    नक्षत्र, ग्रह, तारामंडल निरंतर जलते और बुझते रहते हैं।
    यह दृश्य ऐसे प्रतीत होता है मानो सम्पूर्ण ब्रह्मांड स्वयं दीपावली मना रहा हो।
    यही अनुभूति सिद्धों के अपने निज ब्रह्मांड — सहस्रार कमल दल में होती है।
    वहाँ वे देखते हैं कि भीतर का प्रकाश और बाहरी ब्रह्मांड का प्रकाश एक ही है।
    वहां “मैं” और “ब्रह्मांड” का भेद समाप्त हो जाता है —
    केवल ज्योति ही शेष रह जाती है, और वही परम दीपमाला है।
    ऋषि-मुनियों ने इसी दिव्य अनुभूति को प्रतीकात्मक रूप में दीपावली उत्सव के रूप में मानव समाज को प्रदान किया —
    ताकि प्रत्येक मनुष्य बाहरी दीपों के माध्यम से अपने भीतर के दीप को जगाने की प्रेरणा पाए।
    जब भीतर का दीप जल उठे,
    तभी बाहरी दीपावली सार्थक होती है।
    और वही है —
    सिद्धों के असली दीपावली।

    ॐ सम सिद्धाय नमः
    ॐ श्री पद्मप्रिया सुरम्या रमापति ईशपुत्राय नमः

    #Ishaputra #KaulantakPeeth #MahaHimalaya #Yogini #Sadhana #siddhi #yoga #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendranath #mystic #Meditation #Kulantpeeth #HappyDivali2025 #Divali2025 #dipavali2025
    🌺 आध्यात्मिक दीपावली — सिद्धों के अंतःप्रकाश की अनुभूति 🎆 एक योगी के लिए, एक साधक के लिए, सच्ची दीपमाला अथवा वास्तविक दीपावली वह नहीं है जो बाहर दीपों से जगमगाती है, बल्कि वह है जो अंतःकरण में, चेतना के गहनतम स्तरों पर, भीतर के प्रकाश को जागृत करती है। जब साधक अपनी साधना में निरंतर स्थिर होता है, तो धीरे-धीरे उसकी सुषुम्ना नाड़ी में ऊर्जा का प्रवाह आरंभ होता है, और यह प्रवाह उसे सहस्रार कमल तक पहुँचा देता है — जहाँ एक हजार पंखुड़ियों वाला दिव्य कमल खिलता है। हमारा मस्तिष्क उसी सहस्रार का स्थूल प्रतिबिंब है — इसमें सूक्ष्म रूप से एक हजार बिंदु या पर्ण विद्यमान हैं, जिन्हें योगशास्त्र में “दीये समान बिंदु” कहा गया है। जब साधक गहन ध्यान और जागरूकता के माध्यम से इन सभी बिंदुओं को प्रकाशित कर देता है, तब उसका सम्पूर्ण चैतन्य उज्ज्वल हो उठता है — वही क्षण होता है उसकी असली दीपावली, जहाँ हर पर्ण एक दीपक बनकर भीतर के अंधकार को आलोकित करता है। सिद्धों के अनुभव में यह कहा गया है कि जब वे गहन ध्यानावस्था में प्रवेश करते हैं, और सुषुम्ना मार्ग से क्रमशः ऊपर उठते हुए ब्रह्मरंध्र (सहस्रार द्वार) तक पहुँचते हैं, तो वहाँ एक अलौकिक ज्योति, एक अनंत प्रकाश का सागर अनुभव होता है। उस अवस्था में उन्हें सम्पूर्ण ब्रह्मांड का दृश्य एक बिंदु में सिमटा हुआ प्रतीत होता है — सृष्टि की प्रत्येक ज्योति, प्रत्येक नक्षत्र, प्रत्येक तारा, जैसे किसी दिव्य दीपमाला के रूप में प्रकाशित हो रहा हो। वह अनुभव ही योगी की अंतर्यात्रा की दीपावली है — जहाँ भीतर का दीपक, ब्रह्मांड के दीपों से एकाकार हो जाता है। जिस प्रकार हमारे जीवन में दीपावली का उत्सव आती है — अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप में, उसी प्रकार यह ब्रह्मांडीय दीपावली निरंतर घटित हो रही है। यदि हम सूक्ष्म दृष्टि से देखें, तो यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड अनगिनत दीपों से आलोकित है — नक्षत्र, ग्रह, तारामंडल निरंतर जलते और बुझते रहते हैं। यह दृश्य ऐसे प्रतीत होता है मानो सम्पूर्ण ब्रह्मांड स्वयं दीपावली मना रहा हो। यही अनुभूति सिद्धों के अपने निज ब्रह्मांड — सहस्रार कमल दल में होती है। वहाँ वे देखते हैं कि भीतर का प्रकाश और बाहरी ब्रह्मांड का प्रकाश एक ही है। वहां “मैं” और “ब्रह्मांड” का भेद समाप्त हो जाता है — केवल ज्योति ही शेष रह जाती है, और वही परम दीपमाला है। ऋषि-मुनियों ने इसी दिव्य अनुभूति को प्रतीकात्मक रूप में दीपावली उत्सव के रूप में मानव समाज को प्रदान किया — ताकि प्रत्येक मनुष्य बाहरी दीपों के माध्यम से अपने भीतर के दीप को जगाने की प्रेरणा पाए। जब भीतर का दीप जल उठे, तभी बाहरी दीपावली सार्थक होती है। और वही है — सिद्धों के असली दीपावली। ॐ सम सिद्धाय नमः 🙏 ॐ श्री पद्मप्रिया सुरम्या रमापति ईशपुत्राय नमः 🙏 #Ishaputra #KaulantakPeeth #MahaHimalaya #Yogini #Sadhana #siddhi #yoga #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendranath #mystic #Meditation #Kulantpeeth #HappyDivali2025 #Divali2025 #dipavali2025
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  • "चौंसठ योगिनियाँ" — एक आध्यात्मिक दृष्टि से रहस्यमयी परिचय

    "चौंसठ योगिनियों" के सम्बन्ध में साधारण जनमानस में अनेक अवधारणाएँ प्रचलित हैं, जो प्रायः सीमित एवं अपूर्ण हैं।
    परंतु दिव्य हिमालय के सिद्धों के माध्यम से हमें इन दिव्य शक्तियों के गूढ़ आयामों की झलक प्राप्त होती है।

    योगिनियाँ मात्र देवियाँ नहीं हैं, बल्कि वे आदिशक्ति के विविध रूपों की सजीव अभिव्यक्तियाँ हैं।
    वे वह दिव्य ऊर्जा हैं जो सृष्टि, स्थिति और संहार — तीनों में व्याप्त होकर ब्रह्माण्डीय चक्र को संचालित करती हैं।

    योगिनियाँ तीन प्रमुख गुणों — सत्त्व, रज और तम — में विभक्त मानी जाती हैं।
    प्रत्येक गुण के अंतर्गत ६४-६४ योगिनियाँ आती हैं, अर्थात कुल संख्या १९२ होती है।
    ये तीनों गुण मिलकर सृष्टि के सम्पूर्ण संतुलन का निर्माण करते हैं।

    प्रत्येक योगिनी किसी न किसी तत्त्व, दिशा, ग्रह या चेतना के स्तर से सम्बद्ध होती है।
    वे केवल बाह्य रूप से ही नहीं, बल्कि साधक के अंतःकरण में भी निवास करती हैं।

    इन तीन विभागों — सत्त्व, रज और तम — से चयनित ६४ योगिनियाँ परम विशिष्ट कही जाती हैं।
    यही वे योगिनियाँ हैं जिनकी उपासना "चौंसठ योगिनी तंत्र" में वर्णित है।
    वे साक्षात् महामाया की चैतन्य शक्ति हैं — जो साधक को अज्ञान से ज्ञान, और सीमितता से अनन्तता की ओर ले जाती हैं।

    कुछ साधकों में यह भ्रम पाया जाता है कि तमोगुण की योगिनियाँ ही "६४ कृत्याएँ" हैं,
    परंतु वास्तव में "कृत्याएँ" योगिनियों का केवल एक आयाम हैं — जो शक्ति के कर्मरूप स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती हैं।

    हिमालय के दिव्य सिद्धों के अनुसार, इस कलियुग में योगिनी शक्ति प्रत्यक्ष रूप में संपूर्ण पृथ्वी पर विद्यमान है।
    वे सृष्टि की धड़कन, चेतना की धार, और परमशक्ति की लीलामयी अभिव्यक्ति हैं।

    जो साधक इनके रहस्य को समझ लेता है, वह जान जाता है कि
    योगिनियों की उपासना किसी बाह्य देवी की नहीं, बल्कि अपने भीतर स्थित दिव्य शक्ति की साधना है।
    यह साधना भय या मोह की नहीं, बल्कि आत्मबोध की यात्रा है —
    जहाँ साधक अंततः स्वयं "योगिनी तत्त्व" में विलीन हो जाता है।

    योगिनी शक्ति के सम्बन्ध में हम भविष्य में और भी विस्तार से चर्चा करेंगे।
    फिलहाल के लिए इस विषय को यही विराम देते हैं।

    नमो आदेश।
    ॐ सम सिद्धाय नमः।
    ॐ श्री पद्मप्रिया सुरम्या रमापति ईशपुत्राय नमः।

    #Ishaputra #KaulantakPeeth #MahaHimalaya #Yogini #Sadhana #siddhi #yoga #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendranath #mystic #Meditation #Kulantpeeth
    "चौंसठ योगिनियाँ" — एक आध्यात्मिक दृष्टि से रहस्यमयी परिचय "चौंसठ योगिनियों" के सम्बन्ध में साधारण जनमानस में अनेक अवधारणाएँ प्रचलित हैं, जो प्रायः सीमित एवं अपूर्ण हैं। परंतु दिव्य हिमालय के सिद्धों के माध्यम से हमें इन दिव्य शक्तियों के गूढ़ आयामों की झलक प्राप्त होती है। योगिनियाँ मात्र देवियाँ नहीं हैं, बल्कि वे आदिशक्ति के विविध रूपों की सजीव अभिव्यक्तियाँ हैं। वे वह दिव्य ऊर्जा हैं जो सृष्टि, स्थिति और संहार — तीनों में व्याप्त होकर ब्रह्माण्डीय चक्र को संचालित करती हैं। योगिनियाँ तीन प्रमुख गुणों — सत्त्व, रज और तम — में विभक्त मानी जाती हैं। प्रत्येक गुण के अंतर्गत ६४-६४ योगिनियाँ आती हैं, अर्थात कुल संख्या १९२ होती है। ये तीनों गुण मिलकर सृष्टि के सम्पूर्ण संतुलन का निर्माण करते हैं। प्रत्येक योगिनी किसी न किसी तत्त्व, दिशा, ग्रह या चेतना के स्तर से सम्बद्ध होती है। वे केवल बाह्य रूप से ही नहीं, बल्कि साधक के अंतःकरण में भी निवास करती हैं। इन तीन विभागों — सत्त्व, रज और तम — से चयनित ६४ योगिनियाँ परम विशिष्ट कही जाती हैं। यही वे योगिनियाँ हैं जिनकी उपासना "चौंसठ योगिनी तंत्र" में वर्णित है। वे साक्षात् महामाया की चैतन्य शक्ति हैं — जो साधक को अज्ञान से ज्ञान, और सीमितता से अनन्तता की ओर ले जाती हैं। कुछ साधकों में यह भ्रम पाया जाता है कि तमोगुण की योगिनियाँ ही "६४ कृत्याएँ" हैं, परंतु वास्तव में "कृत्याएँ" योगिनियों का केवल एक आयाम हैं — जो शक्ति के कर्मरूप स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती हैं। हिमालय के दिव्य सिद्धों के अनुसार, इस कलियुग में योगिनी शक्ति प्रत्यक्ष रूप में संपूर्ण पृथ्वी पर विद्यमान है। वे सृष्टि की धड़कन, चेतना की धार, और परमशक्ति की लीलामयी अभिव्यक्ति हैं। जो साधक इनके रहस्य को समझ लेता है, वह जान जाता है कि योगिनियों की उपासना किसी बाह्य देवी की नहीं, बल्कि अपने भीतर स्थित दिव्य शक्ति की साधना है। यह साधना भय या मोह की नहीं, बल्कि आत्मबोध की यात्रा है — जहाँ साधक अंततः स्वयं "योगिनी तत्त्व" में विलीन हो जाता है। योगिनी शक्ति के सम्बन्ध में हम भविष्य में और भी विस्तार से चर्चा करेंगे। फिलहाल के लिए इस विषय को यही विराम देते हैं। नमो आदेश। ॐ सम सिद्धाय नमः। ॐ श्री पद्मप्रिया सुरम्या रमापति ईशपुत्राय नमः। #Ishaputra #KaulantakPeeth #MahaHimalaya #Yogini #Sadhana #siddhi #yoga #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendranath #mystic #Meditation #Kulantpeeth
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  • The International Kaulantak Siddha Vidya Peeth is deeply honoured to share some glimpses of the sacred occasion of Sannyas Diwas, observed every year on the 19th of August.
    This auspicious day holds immense significance in the Kaulantak Peeth tradition, as it is dedicated to the worship of the 64 Yoginīs. On this day, all sixty-four Yoginīs are venerated, and symbolically, the Head Yoginī, who represents the collective power and presence of all the Yoginīs, is specially worshipped by the renunciates of Kaulantak Peeth.
    The observance of Sannyas Diwas is performed in accordance with the Mrikulachara tradition, a sacred lineage where worship is conducted solely through the use of natural elements. True to this ancient custom, the rituals were carried out using plant leaves and other natural offerings, thereby maintaining the purity and authenticity of the Mrikul way.
    On this divine occasion, all Bhairavas and Bhairavīs, especially those who have embraced the path of renunciation, adorn themselves in royal and dignified attire to participate in the Yoginī worship. Alongside the Yoginī Pūjā, the worship of Mrikulādhīśwarī is also performed with great reverence in Kaulantak Peeth on this very day.
    Under the guidance and directions of Mahāsiddha Ishaputra, the presiding Peethādheeshwar of Kaulantak Peeth, the entire community of Bhairav and Bhairavīs offered their heartfelt pūjā and archana to both the Yoginīs and Mrikulādhīśwarī. All rituals were carried out strictly in alignment with the sanctified practices of the Mrikulachara tradition, filling the atmosphere with devotion, purity, and the powerful presence of the Siddha lineage.
    Om Vanaspataye Shantih
    ॐ वनस्पतये शान्तिः

    #sanyas #renunciation #mrikul #kulasanyas #mrikulachar #SiddhaDharm #himalayansiddhatradition #mahasiddha #siddhapedia #KaulantakPeeth #KulantPeeth #Ishaputra #mahasiddhaishaputra #MahayogiSatyendraNath #bhagwanshiv #mahadev #SwachhandBhairav #sadhana #AncientWisdom #kurukulla #meditation #sanatandharma #spiritualjourney #HimalayanSiddhas #hindu #adhyaatma #sanatandharma #sanatani #sanatan
    The International Kaulantak Siddha Vidya Peeth is deeply honoured to share some glimpses of the sacred occasion of Sannyas Diwas, observed every year on the 19th of August. This auspicious day holds immense significance in the Kaulantak Peeth tradition, as it is dedicated to the worship of the 64 Yoginīs. On this day, all sixty-four Yoginīs are venerated, and symbolically, the Head Yoginī, who represents the collective power and presence of all the Yoginīs, is specially worshipped by the renunciates of Kaulantak Peeth. The observance of Sannyas Diwas is performed in accordance with the Mrikulachara tradition, a sacred lineage where worship is conducted solely through the use of natural elements. True to this ancient custom, the rituals were carried out using plant leaves and other natural offerings, thereby maintaining the purity and authenticity of the Mrikul way. On this divine occasion, all Bhairavas and Bhairavīs, especially those who have embraced the path of renunciation, adorn themselves in royal and dignified attire to participate in the Yoginī worship. Alongside the Yoginī Pūjā, the worship of Mrikulādhīśwarī is also performed with great reverence in Kaulantak Peeth on this very day. Under the guidance and directions of Mahāsiddha Ishaputra, the presiding Peethādheeshwar of Kaulantak Peeth, the entire community of Bhairav and Bhairavīs offered their heartfelt pūjā and archana to both the Yoginīs and Mrikulādhīśwarī. All rituals were carried out strictly in alignment with the sanctified practices of the Mrikulachara tradition, filling the atmosphere with devotion, purity, and the powerful presence of the Siddha lineage. Om Vanaspataye Shantih ॐ वनस्पतये शान्तिः #sanyas #renunciation #mrikul #kulasanyas #mrikulachar #SiddhaDharm #himalayansiddhatradition #mahasiddha #siddhapedia #KaulantakPeeth #KulantPeeth #Ishaputra #mahasiddhaishaputra #MahayogiSatyendraNath #bhagwanshiv #mahadev #SwachhandBhairav #sadhana #AncientWisdom #kurukulla #meditation #sanatandharma #spiritualjourney #HimalayanSiddhas #hindu #adhyaatma #sanatandharma #sanatani #sanatan
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  • The International Kaulantak Siddha Vidya Peeth (IKSVP) proudly presents another glimpse of the transformative Akaash Yogini Sadhana Shivir, a two-day journey into the heart of the Himalayan Siddha tradition. This sacred gathering brought together Bhairavs and Bhairavis in devotion and discovery, as they delved into the grace and teachings of Bhagwati Akaash Yogini.
    Guided by Mahasiddha Ishaputra and the revered Acharyas, seekers were led through deep insights into spiritual practices and the divine wisdom of Akaash Yogini Sadhana. The teachings illuminated the connection between cosmic energies and the inner self, offering participants a path to profound spiritual awakening.
    Highlights of the event included foundational lessons in Bansheera Yuddha Vidya and traditional Yoga, filling the space with vibrant energy and devotion. The closing prayers brought a deep sense of gratitude and unity, leaving everyone inspired to continue their spiritual journey.
    Stay tuned for more insights into this sacred experience. IKSVP regularly offers opportunities for seekers to explore these timeless traditions, both online and offline. (Part 2)
    Om Shri Kulant Nath Ishaputray Namah
    Om Shri Kulant Peethaay Namah
    Om Sam Siddhaay Namah
    Om Shri Gurumandalaay Namah
    Om Shri Maha Himalayaay Namah

    #kaulantakpeeth #kulantpeeth #MahayogiSatyendraNath #siddhaYuddhaVidya #antarikshcharayogini #universe #akashchariyogini #HealingSadhana #HimalayanTradition #cosmos #SpiritualWellness #TantricHealing #EnergyActivation #KurukullaTemple #Meditation #akashayoginisadhana #maabhagwati #sanatandharma #Transformation #SpiritualJourney #IKSVP #HimalayanSiddhas #Hindu #Adhyaatma #Shivir #Deeksha #Himalayas #Mahasiddhaishaputra #Siddhatradition #Ishaputra #Saadhna #himalayangod
    The International Kaulantak Siddha Vidya Peeth (IKSVP) proudly presents another glimpse of the transformative Akaash Yogini Sadhana Shivir, a two-day journey into the heart of the Himalayan Siddha tradition. This sacred gathering brought together Bhairavs and Bhairavis in devotion and discovery, as they delved into the grace and teachings of Bhagwati Akaash Yogini. Guided by Mahasiddha Ishaputra and the revered Acharyas, seekers were led through deep insights into spiritual practices and the divine wisdom of Akaash Yogini Sadhana. The teachings illuminated the connection between cosmic energies and the inner self, offering participants a path to profound spiritual awakening. Highlights of the event included foundational lessons in Bansheera Yuddha Vidya and traditional Yoga, filling the space with vibrant energy and devotion. The closing prayers brought a deep sense of gratitude and unity, leaving everyone inspired to continue their spiritual journey. Stay tuned for more insights into this sacred experience. IKSVP regularly offers opportunities for seekers to explore these timeless traditions, both online and offline. (Part 2) Om Shri Kulant Nath Ishaputray Namah Om Shri Kulant Peethaay Namah Om Sam Siddhaay Namah Om Shri Gurumandalaay Namah Om Shri Maha Himalayaay Namah #kaulantakpeeth #kulantpeeth #MahayogiSatyendraNath #siddhaYuddhaVidya #antarikshcharayogini #universe #akashchariyogini #HealingSadhana #HimalayanTradition #cosmos #SpiritualWellness #TantricHealing #EnergyActivation #KurukullaTemple #Meditation #akashayoginisadhana #maabhagwati #sanatandharma #Transformation #SpiritualJourney #IKSVP #HimalayanSiddhas #Hindu #Adhyaatma #Shivir #Deeksha #Himalayas #Mahasiddhaishaputra #Siddhatradition #Ishaputra #Saadhna #himalayangod
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  • The International Kaulantak Siddha Vidya Peeth (IKSVP) recently conducted the sacred Akaash Yogini Sadhna,a two-day transformative course deeply rooted in the Himalayan Siddha tradition. This divine gathering brought together Bhairavs and Bhairavis to immerse themselves in the teachings of Bhagwati Akaash Yogini and partake in profound spiritual practices.
    Over the two days, Mahasiddha Ishaputra and the Acharyas, illuminated the essence of Akaash Yogini Sadhna. They unveiled profound truths about Bhagwati Akaash Yogini, guiding seekers towards the depths of her divine grace.
    These teachings allowed seekers to deepen their understanding of the interplay between cosmic forces and their inner selves. The Acharyas also imparted foundational knowledge of Bansheera Yuddh Vidya, and traditional Yoga, infusing the event with a vibrant spiritual energy.
    The event ended with prayers, leaving everyone inspired and connected to their spiritual path. We're happy to share these glimpses of this sacred gathering. For those interested in experiencing these spiritual traditions, IKSVP offers regular courses, both online and offline.
    (Part 1)
    Om Shri Kulant Nath Ishaputray Namah
    Om Shri Kulant Peethaay Namah
    Om Sam Siddhaay Namah
    Om Shri Gurumandalaay Namah
    Om Shri Maha Himalayaay Namah

    #KurukullaTemple #akashayoginisadhana #Ishaputra #SiddhaDharma #MahayogiSatyendraNath #siddhaYuddhaVidya #KulantPeeth #KaulantakPeeth #IKSVP #kurukulla #sanatani #hindu #dharma #yoga #kalki #spirituality #antarikshcharayogini #akashchariyogini #cosmos #universe
    The International Kaulantak Siddha Vidya Peeth (IKSVP) recently conducted the sacred Akaash Yogini Sadhna,a two-day transformative course deeply rooted in the Himalayan Siddha tradition. This divine gathering brought together Bhairavs and Bhairavis to immerse themselves in the teachings of Bhagwati Akaash Yogini and partake in profound spiritual practices. Over the two days, Mahasiddha Ishaputra and the Acharyas, illuminated the essence of Akaash Yogini Sadhna. They unveiled profound truths about Bhagwati Akaash Yogini, guiding seekers towards the depths of her divine grace. These teachings allowed seekers to deepen their understanding of the interplay between cosmic forces and their inner selves. The Acharyas also imparted foundational knowledge of Bansheera Yuddh Vidya, and traditional Yoga, infusing the event with a vibrant spiritual energy. The event ended with prayers, leaving everyone inspired and connected to their spiritual path. We're happy to share these glimpses of this sacred gathering. For those interested in experiencing these spiritual traditions, IKSVP offers regular courses, both online and offline. (Part 1) Om Shri Kulant Nath Ishaputray Namah Om Shri Kulant Peethaay Namah Om Sam Siddhaay Namah Om Shri Gurumandalaay Namah Om Shri Maha Himalayaay Namah #KurukullaTemple #akashayoginisadhana #Ishaputra #SiddhaDharma #MahayogiSatyendraNath #siddhaYuddhaVidya #KulantPeeth #KaulantakPeeth #IKSVP #kurukulla #sanatani #hindu #dharma #yoga #kalki #spirituality #antarikshcharayogini #akashchariyogini #cosmos #universe
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  • International Kaulantak Siddha Vidya Peeth (IKSVP) presents the sacred glimpses of the recent course on Devabhisheka, an important part of Dev Sadhana in the Himalayan Siddha tradition. This sacred two-day ritual, conducted by IKSVP, was a profound spiritual event for all Bhairavs and Bhairavis.
    Day 1 began with Kaulantak Peethadishwar Ishaputra gracing the gathering, addressing and explaining the meaning and significance of Devabhisheka. A grand Saptsindhu chakra was crafted in the soil, followed by a yagya, invoking divine energies.
    Day 2 saw a serene atmosphere with everyone dressed in white. The Devabhisheka was bestowed by Kaulantak Peethadishwar upon the Bhairavs and Bhairavis, who carried a symbolic sword as an astra. The sacred waters, part of the Tirthan river, were icy cold, yet people’s spirits remained high, and everyone participated with devotion. By dusk, another powerful yagya took place, concluding with the pooja of 64 yoginis, marking the completion of this divine event.
    We are sharing with you these glimpses, so you can witness the energy of this sacred ceremony. If you wish to experience the spiritual depth of such traditions, you are welcome to join the regular courses offered by IKSVP, both online and offline.
    Om Shri Kulant Nathaay Namah.
    Om Shri Kulant Peethaay Namah.
    Om Sam Siddhaay Namah.
    Om Shri Gurumandalaay Namah.
    Om Shri MahaHimalayaay NAmah.
    Om Shri Swachchanda Bhairavaay Namah.
    Om Shri Kulle Kurukulle Namah.

    #Devabhisheka #Siddhas #abhisheka #ishaputra #MahasiddhaIshaputra #Kulantpeeth #Kurukulla #kurukullaTemple #IKSVP #DevaDharma #DeshajParampara #Healing #IKSVP #Spirituality #AncientWisdom #GoddessKurukulla #Saptrishis #Mysticism #KaulantakPeeth #Ishaputra #DivineBlessings #Mahasiddha #KaulantakSiddhaVidyaPeeth
    International Kaulantak Siddha Vidya Peeth (IKSVP) presents the sacred glimpses of the recent course on Devabhisheka, an important part of Dev Sadhana in the Himalayan Siddha tradition. This sacred two-day ritual, conducted by IKSVP, was a profound spiritual event for all Bhairavs and Bhairavis. Day 1 began with Kaulantak Peethadishwar Ishaputra gracing the gathering, addressing and explaining the meaning and significance of Devabhisheka. A grand Saptsindhu chakra was crafted in the soil, followed by a yagya, invoking divine energies. Day 2 saw a serene atmosphere with everyone dressed in white. The Devabhisheka was bestowed by Kaulantak Peethadishwar upon the Bhairavs and Bhairavis, who carried a symbolic sword as an astra. The sacred waters, part of the Tirthan river, were icy cold, yet people’s spirits remained high, and everyone participated with devotion. By dusk, another powerful yagya took place, concluding with the pooja of 64 yoginis, marking the completion of this divine event. We are sharing with you these glimpses, so you can witness the energy of this sacred ceremony. If you wish to experience the spiritual depth of such traditions, you are welcome to join the regular courses offered by IKSVP, both online and offline. Om Shri Kulant Nathaay Namah. Om Shri Kulant Peethaay Namah. Om Sam Siddhaay Namah. Om Shri Gurumandalaay Namah. Om Shri MahaHimalayaay NAmah. Om Shri Swachchanda Bhairavaay Namah. Om Shri Kulle Kurukulle Namah. #Devabhisheka #Siddhas #abhisheka #ishaputra #MahasiddhaIshaputra #Kulantpeeth #Kurukulla #kurukullaTemple #IKSVP #DevaDharma #DeshajParampara #Healing #IKSVP #Spirituality #AncientWisdom #GoddessKurukulla #Saptrishis #Mysticism #KaulantakPeeth #Ishaputra #DivineBlessings #Mahasiddha #KaulantakSiddhaVidyaPeeth
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