• Pink Flower of the day
    Pink Flower of the day 🌸
    Love
    Yay
    3
    0 Reacties 0 aandelen 115 Views 0 voorbeeld
  • ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन

    ६) मेरे वचनों पर श्रद्धा रख, अपने ईश्वर को सदा पुकारते रहना। क्योंकि मैंने उसका स्नेह पुकारने के कारण पाया और अब वो तुम्हारी ओर देखते है।
    Like
    Love
    2
    0 Reacties 0 aandelen 71 Views 0 voorbeeld
  • Like
    2
    0 Reacties 0 aandelen 74 Views 0 voorbeeld
  • “भैरवी ज्योत्स्नाकृत कौलान्तकनाथ ईशपुत्र स्तुति”

    ॥ अथ श्री भैरवी ज्योत्स्नाकृत कौलान्तक नाथ ईशपुत्र स्तुति ॥

    ॐ महातपः महातपेश्वराय महातेजोमय जगत्पते।
    महासिद्ध महायोगिन महापुरुषाय नमोस्तुते ।।
    महारौद्र महानाथ महाकौल महाप्रभो।
    महाचीनज्ञ महावामज्ञ महासत्वज्ञयाय नमोस्तुते ।।

    महाअघोर महाज्ञान महाअवतार तमोहन।
    महाविकर्तन महातेज महाईश नमोस्तुते॥
    सत्याय च नमस्तुभ्यं सत्येन्द्र नाथाय च नमः ।
    महाभैरवाय च नमस्तुभ्यं अप्सरापतये नमो नमः ।।

    हठाधिपतये च नमस्तुभ्यं ईशपुत्राय वै नमः ।
    निराकाराय च नमस्तुभ्यं साकाराय नमो नमः ।।
    ईशदूताय नमस्तुभ्यं प्रत्यक्षपुरुषाय वै नमः ।
    हिमशिखराधिपतये नमस्तुभ्यं शुक्लवर्ण नमो नमः ।।

    आदि महारहस्य स्वरूपाय रुद्ररूपाय वै नमः ।
    विष्णुअंश भूताय च युगावताराय वै नमः ।।
    महेश्वर रुप्सत्वं सत्येन्द्र नाथाय नमोस्तुते ।
    ईशपुत्राय नमस्तुभ्यं बंधमोचनाय नमोस्तुते ।।

    सोम रूप नमस्तुभ्यं सर्वेश्वरानन्द नाथाय नमोस्तुते।
    महाहिमालयाधिपते नमस्तुभ्यं अकाशाधिपते नमो नमः ।।
    सिद्धरूप नमस्तुभ्यं वैष्णव नाथाय नमोस्तुते।
    कुण्डलिनी नाथाय नमस्तुभ्यं मायापति नमोस्तुते ।।

    बालरूप नमस्तुभ्यं यौवननाथाय नमोस्तुते।
    वरदाताय नमस्तुभ्यं अभयदाताय नमो नमः ।।
    नमः शान्त रूपाभ्याम शाश्वताय नमो नमः ।
    सं सिद्धाय नमस्तुभ्यं निष्कलन्काय नमो नमः ।।

    सद्चिदानंद स्वरूपाय सत्येन्द्रनाथाय ते नमः ।
    प्रसीद में नमो नित्यं श्वेतवर्णाय नमोस्तुते ।।
    प्रसीद में ईशपुत्राय नित्यस्थिताय नमो नमः ।
    क्रीं बीजोद्भवाय पूर्ण स्वरूपाय आदिनाथ तेजसे
    स्वः सम्पूर्ण मन्त्राय कं कौलनाथाय ते नमः ।।

    ।। इति श्री भैरवी ज्योत्स्नाकृत कौलान्तक नाथ ईशपुत्र स्तुति संपूर्णम ।।
    Like
    Love
    2
    0 Reacties 0 aandelen 76 Views 0 voorbeeld
  • The International Kaulantak Siddha Vidya Peeth is delighted to share the profound experiences and insights gathered during the Kularnava Tantra Sadhana Shivir, held on October 25th and 26th. This two-day spiritual retreat was imbued with devotion, discipline, and a sincere longing to absorb the timeless wisdom of the Siddha tradition.
    Each morning began with the regular yet deeply transformative practices of Yoga and Kaulachar Kram. These foundational disciplines of the Siddha lineage enabled participants to attune themselves to their physical and subtle bodies, preparing them to receive higher spiritual knowledge. The harmonious flow of breath, movement, and mantra created a sacred atmosphere, allowing seekers to sink into deeper stillness and heightened awareness.
    Following this preparatory phase, the main karmakanda of the sadhana commenced. Under the guidance of Mahasiddha Ishaputra, all Bhairavs and Bhairavis collectively performed the Avaran Pooja and Havan, filling the space with powerful spiritual vibrations.
    As night descended, the much-awaited process of Deeksha began. This sacred initiation was an extensive and profound ritual that continued well into the early hours of the morning.
    After the Deeksha, many Bhairavs and Bhairavis engaged in a heartfelt dialogue with Mahasiddha Ishaputra, seeking clarity on various aspects of sadhana and spirituality.
    Thus, the Shivir concluded on a deeply enriching note—marked by expanded understanding, inner elevation, and significant spiritual growth for all who participated.
    #sadhana #himalayantantra #tantra #kularnavatantra
    #himalayandevaparamapara #SiddhaDharma #SiddhaTradition #lordshiva #bhagwanshiv #mahadev #SwachhandBhairav #kurukulla #AncientWisdom #siddhapedia #KaulantakPeeth #KulantPeeth #Ishaputra #mahasiddhaishaputra #MahayogiSatyendraNath #meditation #sanatandharma #transformation #spiritualjourney #himalayansiddha #hindu #adhyaatma #himalayangod #scrolllink
    Love
    Yay
    2
    0 Reacties 0 aandelen 78 Views 0 voorbeeld
  • #NewsLiveNow हाल ही में इंडिगो के संकट के चलते कई यात्रियों को काफी नुकसान झेलना पड़ा, जिसका मुआवजा इंडिगो एयरलाइंस 10,000 रुपए के ट्रैवल वाउचर्स देकर करेगी, जिन्हें अगले 12 माह तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

    #newsinhindi #indigoairlines #IndiGoCrisis
    #NewsLiveNow हाल ही में इंडिगो के संकट के चलते कई यात्रियों को काफी नुकसान झेलना पड़ा, जिसका मुआवजा इंडिगो एयरलाइंस 10,000 रुपए के ट्रैवल वाउचर्स देकर करेगी, जिन्हें अगले 12 माह तक इस्तेमाल किया जा सकता है। #newsinhindi #indigoairlines #IndiGoCrisis
    NEWSLIVENOW.COM
    इंडिगो के यात्रियों को मिली राहत, मिलेंगे 10,000 रुपए के ट्रैवल वाउचर्स
    (न्यूज़लाइवनाउ-India) हाल ही में इंडिगो के संकट के चलते कई यात्रियों को काफी नुकसान झेलना पड़ा, जिसका मुआवजा इंडिगो एयरलाइंस 10,000 रुपए के ट्रैवल वाउचर्स
    Like
    4
    0 Reacties 0 aandelen 385 Views 0 voorbeeld
  • #NewsLiveNow अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ ज़िले में गुरुवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना घटित हुई। चकलागम क्षेत्र में श्रमिकों से भरा एक ट्रक पहाड़ की ढलान से फिसलकर गहरी घाटी में जा गिरा। वाहन में कुल 22 कामगार मौजूद थे, जिन सभी की इस हादसे में दुखद मृत्यु हो गई।

    #BreakingNews #HindiNews #ArunachalPradesh #RoadAccident
    #NewsLiveNow अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ ज़िले में गुरुवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना घटित हुई। चकलागम क्षेत्र में श्रमिकों से भरा एक ट्रक पहाड़ की ढलान से फिसलकर गहरी घाटी में जा गिरा। वाहन में कुल 22 कामगार मौजूद थे, जिन सभी की इस हादसे में दुखद मृत्यु हो गई। #BreakingNews #HindiNews #ArunachalPradesh #RoadAccident
    Like
    4
    0 Reacties 0 aandelen 632 Views 0 voorbeeld
  • Yay
    Love
    3
    2 Reacties 0 aandelen 208 Views 0 voorbeeld
  • Love
    Like
    Yay
    5
    2 Reacties 0 aandelen 206 Views 0 voorbeeld
  • रहस्य और महायोगी

    जीवन में सब कुछ रहस्य ही है, हम किस माता पिता के घर जन्मेंगे नहीं जानते थे, आगे कहाँ जन्म लेंगे नहीं पता, क्यों जी रहे हैं? क्यों मर जायेंगे? ये सब एक रहस्य है? कोई कहता है पुनर्जन्म नहीं होता, कोई कहता है कि भगवान भी नहीं? कोई तो आत्मा तक को नकार देता है? किसी-किसी का बड़ा ही स्थूल चिंतन है, तो कोई सारी उम्र परमात्म पथ की खोज में बिता देता है, हमारे विचार भी एक से नहीं हैं, जीवन में धन, सम्मान, पदवी का अहंकार और रोग, दुःख व मृत्यु के सामने सब बेकार, हम कौन है? कहाँ से आये हैं? कहाँ जायेंगे? क्या हम सचमुच अकेले हैं? इतनी बड़ी दुनिया क्यों है? कोई अदृश्य सत्ता होती है क्या? ये समय क्या है? क्या बुद्धिवादी होना अच्छा है या हृदयवादी? संसार से मुक्ति क्या संभव है? यदि है तो वो मुक्ति क्या है? मायाजाल क्या है?
    ऐसे न जाने कितने रहस्य हैं जिनको विज्ञान भी सुलझाने चला है और इंसान भी, सदियों से प्रयास हो रहे हैं, लेकिन कौलान्तक पीठ इन सब बातों का शब्दों में जबाब देने कि बजाये आपको साधना का मार्ग और भीतर का सूत्र देता है, यही सूत्र सारे रहस्यों पर से पर्दा उठा सकते हैं, कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज को इन रहस्यों का सम्राट कहा जाता है, सिद्ध योगियों की गूढ़ परम्परा में रहस्यों का भंडार भरा हुआ है, जिनको समझाना बड़ा जटिल है लेकिन असम्भव नहीं, इन रहस्यों के कारण जहाँ हिमालय के योगी विश्वप्रसिद्ध हुए, वहीं उन पर काल्पनिक संसार रचाने का मनघडंत आरोप भी नास्तिकों नें कई सौ सालों पहले ही जड़ दिया,किन्तु महायोगी तर्क-वितर्क में नहीं पड़ते उनका कहना है कि " जैसे मीठे पदार्थ की मीठास की व्याख्य नहीं हो सकती वैसे ही रहस्यों की रहस्यमयता की व्याख्य नहीं बल्कि केवल अनुभूति हो सकती है ।"
    रहस्य और महायोगी जीवन में सब कुछ रहस्य ही है, हम किस माता पिता के घर जन्मेंगे नहीं जानते थे, आगे कहाँ जन्म लेंगे नहीं पता, क्यों जी रहे हैं? क्यों मर जायेंगे? ये सब एक रहस्य है? कोई कहता है पुनर्जन्म नहीं होता, कोई कहता है कि भगवान भी नहीं? कोई तो आत्मा तक को नकार देता है? किसी-किसी का बड़ा ही स्थूल चिंतन है, तो कोई सारी उम्र परमात्म पथ की खोज में बिता देता है, हमारे विचार भी एक से नहीं हैं, जीवन में धन, सम्मान, पदवी का अहंकार और रोग, दुःख व मृत्यु के सामने सब बेकार, हम कौन है? कहाँ से आये हैं? कहाँ जायेंगे? क्या हम सचमुच अकेले हैं? इतनी बड़ी दुनिया क्यों है? कोई अदृश्य सत्ता होती है क्या? ये समय क्या है? क्या बुद्धिवादी होना अच्छा है या हृदयवादी? संसार से मुक्ति क्या संभव है? यदि है तो वो मुक्ति क्या है? मायाजाल क्या है? ऐसे न जाने कितने रहस्य हैं जिनको विज्ञान भी सुलझाने चला है और इंसान भी, सदियों से प्रयास हो रहे हैं, लेकिन कौलान्तक पीठ इन सब बातों का शब्दों में जबाब देने कि बजाये आपको साधना का मार्ग और भीतर का सूत्र देता है, यही सूत्र सारे रहस्यों पर से पर्दा उठा सकते हैं, कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज को इन रहस्यों का सम्राट कहा जाता है, सिद्ध योगियों की गूढ़ परम्परा में रहस्यों का भंडार भरा हुआ है, जिनको समझाना बड़ा जटिल है लेकिन असम्भव नहीं, इन रहस्यों के कारण जहाँ हिमालय के योगी विश्वप्रसिद्ध हुए, वहीं उन पर काल्पनिक संसार रचाने का मनघडंत आरोप भी नास्तिकों नें कई सौ सालों पहले ही जड़ दिया,किन्तु महायोगी तर्क-वितर्क में नहीं पड़ते उनका कहना है कि " जैसे मीठे पदार्थ की मीठास की व्याख्य नहीं हो सकती वैसे ही रहस्यों की रहस्यमयता की व्याख्य नहीं बल्कि केवल अनुभूति हो सकती है ।"
    Love
    Yay
    7
    1 Reacties 0 aandelen 311 Views 0 voorbeeld