ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन

९) मैं (ईश्वर) कौन हूँ, कहाँ हूँ, कैसा हूँ? बुद्धि से विचारते ही रह जाओगे। स्वीकार करो की तुम न्यून हो और प्रेम से प्रार्थना करो। तब मैं अप्रकट होते हुए भी प्रकट होने लगता हूँ।
ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन ९) मैं (ईश्वर) कौन हूँ, कहाँ हूँ, कैसा हूँ? बुद्धि से विचारते ही रह जाओगे। स्वीकार करो की तुम न्यून हो और प्रेम से प्रार्थना करो। तब मैं अप्रकट होते हुए भी प्रकट होने लगता हूँ।
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