One of my poem

क्यों इश्क़ में खुद को ही खोता है मन,
क्यों यादों के भारी गम ढोता है मन।
इन बीते लम्हों की परछाइयों में,
क्यों आहें भर रोता है मन।

मिलन की वो घड़ी कहाँ खो गई,
ये तन्हाई कैसे मेरी हो गई।
प्यार की इन दर्द भरी राहों पर आज,
क्यों विरह के अश्कों की माला पिरोता है मन।

जब से गए हो तुम छोड़कर,
मैं रह गया हूँ यूँ टूटकर।
सुकूँ जाने मेरा कहाँ खो गया,
क्यों अब प्यार करने से डरता है मन।

माना कि आज तुम गैरों के हो गए,
मेरी आँखों के सारे सपने खो गए।
फिर भी छुपाकर ज़माने से अपने ये ग़म,
क्यों पतझड़ के पत्तों सा उदास होता है मन।
#sadness #love #pain #seperation
One of my poem 😓 😭 क्यों इश्क़ में खुद को ही खोता है मन, क्यों यादों के भारी गम ढोता है मन। इन बीते लम्हों की परछाइयों में, क्यों आहें भर रोता है मन। मिलन की वो घड़ी कहाँ खो गई, ये तन्हाई कैसे मेरी हो गई। प्यार की इन दर्द भरी राहों पर आज, क्यों विरह के अश्कों की माला पिरोता है मन। जब से गए हो तुम छोड़कर, मैं रह गया हूँ यूँ टूटकर। सुकूँ जाने मेरा कहाँ खो गया, क्यों अब प्यार करने से डरता है मन। माना कि आज तुम गैरों के हो गए, मेरी आँखों के सारे सपने खो गए। फिर भी छुपाकर ज़माने से अपने ये ग़म, क्यों पतझड़ के पत्तों सा उदास होता है मन। #sadness #love #pain #seperation
Love
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