• #NewsLiveNow सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि केवल गाली देना, अपमानजनक या असभ्य भाषा का प्रयोग करना अपने आप में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 294 के तहत अश्लीलता की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने कहा कि कानूनी दृष्टि से अश्लीलता और अभद्र या अपमानजनक भाषा एक जैसी नहीं मानी जा सकती। किसी अभिव्यक्ति को अश्लील साबित करने के लिए यह दिखाना आवश्यक होगा कि उसमें यौन उत्तेजना पैदा करने वाले तत्व मौजूद हों, वह कामुक भावनाओं को उकसाने वाली हो और उसका प्रभाव लोगों, विशेषकर संवेदनशील या कमजोर मानसिकता वाले व्यक्तियों, के नैतिक आचरण को दूषित करने वाला हो।

    #SupremeCourt #Abusive #OffensiveLanguage 

    #NewsLiveNow सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि केवल गाली देना, अपमानजनक या असभ्य भाषा का प्रयोग करना अपने आप में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 294 के तहत अश्लीलता की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने कहा कि कानूनी दृष्टि से अश्लीलता और अभद्र या अपमानजनक भाषा एक जैसी नहीं मानी जा सकती। किसी अभिव्यक्ति को अश्लील साबित करने के लिए यह दिखाना आवश्यक होगा कि उसमें यौन उत्तेजना पैदा करने वाले तत्व मौजूद हों, वह कामुक भावनाओं को उकसाने वाली हो और उसका प्रभाव लोगों, विशेषकर संवेदनशील या कमजोर मानसिकता वाले व्यक्तियों, के नैतिक आचरण को दूषित करने वाला हो। #SupremeCourt #Abusive #OffensiveLanguage 
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