Mises à jour récentes
  • Love
    3
    0 Commentaires 0 Parts 120 Vue 0 Aperçu
  • ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन

    ९) मैं (ईश्वर) कौन हूँ, कहाँ हूँ, कैसा हूँ? बुद्धि से विचारते ही रह जाओगे। स्वीकार करो की तुम न्यून हो और प्रेम से प्रार्थना करो। तब मैं अप्रकट होते हुए भी प्रकट होने लगता हूँ।
    ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन ९) मैं (ईश्वर) कौन हूँ, कहाँ हूँ, कैसा हूँ? बुद्धि से विचारते ही रह जाओगे। स्वीकार करो की तुम न्यून हो और प्रेम से प्रार्थना करो। तब मैं अप्रकट होते हुए भी प्रकट होने लगता हूँ।
    Love
    Like
    7
    1 Commentaires 0 Parts 318 Vue 0 Aperçu
  • https://youtu.be/apqBuCYRde4?si=nmVGYu8O2KsMLwSs
    https://youtu.be/apqBuCYRde4?si=nmVGYu8O2KsMLwSs
    Love
    1
    1 Commentaires 0 Parts 264 Vue 0 Aperçu
  • 'महासिद्ध ईशपुत्र' को प्रेम करने वाले आज सम्पूर्ण विश्व में हैं। सभी 'जनवरी' महीने में उनका 'दीक्षा दिवस' मानते हैं। किन्तु क्या है 'ईशपुत्र' का 'दीक्षा दिवस' और क्यों अभी तक इस 'दीक्षा दिवस' को मनाने को ले कर आम सहमति नहीं है। कौन सी दीक्षा हुई व कब हुई? ये सब जानने के लिए आप प्रस्तुत विडिओ को अवश्य देखिये और हिमालय की 'कौलान्तक पीठ' के रहस्य को भी जानिए।

    #KaulantakPeeth #KulantPeeth #Ishaputra #IKSVP #MahayogiSatyendraNath #Mahasiddha #SiddhaDharm #DeekshaDivas #InitiationDay #DevaDeeksha #DivinePowers #IshaputraDocumentary
    'महासिद्ध ईशपुत्र' को प्रेम करने वाले आज सम्पूर्ण विश्व में हैं। सभी 'जनवरी' महीने में उनका 'दीक्षा दिवस' मानते हैं। किन्तु क्या है 'ईशपुत्र' का 'दीक्षा दिवस' और क्यों अभी तक इस 'दीक्षा दिवस' को मनाने को ले कर आम सहमति नहीं है। कौन सी दीक्षा हुई व कब हुई? ये सब जानने के लिए आप प्रस्तुत विडिओ को अवश्य देखिये और हिमालय की 'कौलान्तक पीठ' के रहस्य को भी जानिए। #KaulantakPeeth #KulantPeeth #Ishaputra #IKSVP #MahayogiSatyendraNath #Mahasiddha #SiddhaDharm #DeekshaDivas #InitiationDay #DevaDeeksha #DivinePowers #IshaputraDocumentary
    Love
    Yay
    7
    2 Commentaires 1 Parts 5KB Vue 0 Aperçu
  • ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन

    ८) ईश्वरीय अवतार या दूतों का आगमन इसी कारण होता है की तुम उनको छू कर देख सको और विराट, सामर्थ्यवान ईश्वर को छोटी सी इकाई में अनुभव कर सको। ईश्वर का वाक्य है कि उन्हें (अवतारों और दूतों) मुझसे अलग मत पाना क्योंकि उनकी अंगुली मेरी अंगुली है, उनके पास अपनी कोई अंगुली नहीं।
    ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन ८) ईश्वरीय अवतार या दूतों का आगमन इसी कारण होता है की तुम उनको छू कर देख सको और विराट, सामर्थ्यवान ईश्वर को छोटी सी इकाई में अनुभव कर सको। ईश्वर का वाक्य है कि उन्हें (अवतारों और दूतों) मुझसे अलग मत पाना क्योंकि उनकी अंगुली मेरी अंगुली है, उनके पास अपनी कोई अंगुली नहीं।
    Love
    Yay
    3
    1 Commentaires 0 Parts 538 Vue 0 Aperçu
  • Tensions between Thailand and Cambodia have escalated after the Thai military reportedly destroyed a Hindu deity statue in a disputed Cambodian area. Videos circulating show the alleged removal of Cambodian symbols from the site, raising concerns over cultural and territorial violations. Both governments have yet to issue verified statements, prompting regional observers to call for independent verification and restraint. The incident underscores the fragility of border relations and the sensitivity surrounding heritage sites in contested zones, highlighting the urgent need for diplomatic dialogue to prevent further escalation. Source: X/Alchon_Hun

    #thailand #cambodia #hindudeity #scrollink
    Tensions between Thailand and Cambodia have escalated after the Thai military reportedly destroyed a Hindu deity statue in a disputed Cambodian area. Videos circulating show the alleged removal of Cambodian symbols from the site, raising concerns over cultural and territorial violations. Both governments have yet to issue verified statements, prompting regional observers to call for independent verification and restraint. The incident underscores the fragility of border relations and the sensitivity surrounding heritage sites in contested zones, highlighting the urgent need for diplomatic dialogue to prevent further escalation. Source: X/Alchon_Hun #thailand #cambodia #hindudeity #scrollink
    Sad
    Angry
    2
    1 Commentaires 0 Parts 1KB Vue 5 0 Aperçu
  • सिद्ध गुरु का सानिध्य

    आगम ग्रंथों में शिव स्वयं देवी पार्वती जी को कहते हैं की ''कलि काल में प्रत्यक्ष मायावी सिद्ध गुरु के सान्निध्य को मेरा ही सानिद्ध्य मानना, क्योंकि कोई मिटटी का पुतला इतना साहस नहीं रखता की वो 'शिव की महिमा' को अपने मुख से उच्चरित कर सके. 'शिव विद्याओं' को केवल में ही अपने मुख से बताने वाला हूँ.''

    'कौलान्तक नाथ' कहते हैं की '' 'शिव पुत्र' 'निर्भय' होते हैं, वो 'काल की चुनौती' को भी स्वीकारते हैं. तो' शिव भक्त' धन, संपत्ति और दिव्यता से हीन हों ये हो ही नहीं सकता.''

    हम 'संत नहीं' 'सिद्धों के योद्धा' हैं 'भारत के सुपूत' हैं, 'संस्कृति के पालक' हैं और 'अध्यात्म सहित मानव कल्याण' के 'पोषक' हैं. हमारे ही 'मृतक शरीरों' पर 'सभ्यताएं' सुख की साँसें लेती हैं
    सिद्ध गुरु का सानिध्य आगम ग्रंथों में शिव स्वयं देवी पार्वती जी को कहते हैं की ''कलि काल में प्रत्यक्ष मायावी सिद्ध गुरु के सान्निध्य को मेरा ही सानिद्ध्य मानना, क्योंकि कोई मिटटी का पुतला इतना साहस नहीं रखता की वो 'शिव की महिमा' को अपने मुख से उच्चरित कर सके. 'शिव विद्याओं' को केवल में ही अपने मुख से बताने वाला हूँ.'' 'कौलान्तक नाथ' कहते हैं की '' 'शिव पुत्र' 'निर्भय' होते हैं, वो 'काल की चुनौती' को भी स्वीकारते हैं. तो' शिव भक्त' धन, संपत्ति और दिव्यता से हीन हों ये हो ही नहीं सकता.'' हम 'संत नहीं' 'सिद्धों के योद्धा' हैं 'भारत के सुपूत' हैं, 'संस्कृति के पालक' हैं और 'अध्यात्म सहित मानव कल्याण' के 'पोषक' हैं. हमारे ही 'मृतक शरीरों' पर 'सभ्यताएं' सुख की साँसें लेती हैं
    Love
    2
    1 Commentaires 0 Parts 313 Vue 0 Aperçu
  • बांग्लादेश में जो हो रहा है भला आपको चिंता क्यों होगी? याद रखो ये दिन यहाँ भी आने वाले हैं।

    #mulle #islam #jehadi #malechch
    Like
    1
    0 Commentaires 0 Parts 263 Vue 0 Aperçu
  • ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन

    ७) ईश्वर का आभार व्यक्त करने के लिए तुम पत्थरों पर पत्थर रख कर एक ढेर बनाओ या फिर मंदिर, मठ, पूजाघर। ईश्वर तुम्हारे प्रेम के कारण सबको एक सा ही देखता है और तुम्हारे सुन्दर प्रयासों पर मुस्कुराता है।
    ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन ७) ईश्वर का आभार व्यक्त करने के लिए तुम पत्थरों पर पत्थर रख कर एक ढेर बनाओ या फिर मंदिर, मठ, पूजाघर। ईश्वर तुम्हारे प्रेम के कारण सबको एक सा ही देखता है और तुम्हारे सुन्दर प्रयासों पर मुस्कुराता है।
    Love
    Yay
    Like
    8
    2 Commentaires 0 Parts 342 Vue 0 Aperçu
  • रहस्य और महायोगी

    जीवन में सब कुछ रहस्य ही है, हम किस माता पिता के घर जन्मेंगे नहीं जानते थे, आगे कहाँ जन्म लेंगे नहीं पता, क्यों जी रहे हैं? क्यों मर जायेंगे? ये सब एक रहस्य है? कोई कहता है पुनर्जन्म नहीं होता, कोई कहता है कि भगवान भी नहीं? कोई तो आत्मा तक को नकार देता है? किसी-किसी का बड़ा ही स्थूल चिंतन है, तो कोई सारी उम्र परमात्म पथ की खोज में बिता देता है, हमारे विचार भी एक से नहीं हैं, जीवन में धन, सम्मान, पदवी का अहंकार और रोग, दुःख व मृत्यु के सामने सब बेकार, हम कौन है? कहाँ से आये हैं? कहाँ जायेंगे? क्या हम सचमुच अकेले हैं? इतनी बड़ी दुनिया क्यों है? कोई अदृश्य सत्ता होती है क्या? ये समय क्या है? क्या बुद्धिवादी होना अच्छा है या हृदयवादी? संसार से मुक्ति क्या संभव है? यदि है तो वो मुक्ति क्या है? मायाजाल क्या है?
    ऐसे न जाने कितने रहस्य हैं जिनको विज्ञान भी सुलझाने चला है और इंसान भी, सदियों से प्रयास हो रहे हैं, लेकिन कौलान्तक पीठ इन सब बातों का शब्दों में जबाब देने कि बजाये आपको साधना का मार्ग और भीतर का सूत्र देता है, यही सूत्र सारे रहस्यों पर से पर्दा उठा सकते हैं, कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज को इन रहस्यों का सम्राट कहा जाता है, सिद्ध योगियों की गूढ़ परम्परा में रहस्यों का भंडार भरा हुआ है, जिनको समझाना बड़ा जटिल है लेकिन असम्भव नहीं, इन रहस्यों के कारण जहाँ हिमालय के योगी विश्वप्रसिद्ध हुए, वहीं उन पर काल्पनिक संसार रचाने का मनघडंत आरोप भी नास्तिकों नें कई सौ सालों पहले ही जड़ दिया,किन्तु महायोगी तर्क-वितर्क में नहीं पड़ते उनका कहना है कि " जैसे मीठे पदार्थ की मीठास की व्याख्य नहीं हो सकती वैसे ही रहस्यों की रहस्यमयता की व्याख्य नहीं बल्कि केवल अनुभूति हो सकती है ।"
    रहस्य और महायोगी जीवन में सब कुछ रहस्य ही है, हम किस माता पिता के घर जन्मेंगे नहीं जानते थे, आगे कहाँ जन्म लेंगे नहीं पता, क्यों जी रहे हैं? क्यों मर जायेंगे? ये सब एक रहस्य है? कोई कहता है पुनर्जन्म नहीं होता, कोई कहता है कि भगवान भी नहीं? कोई तो आत्मा तक को नकार देता है? किसी-किसी का बड़ा ही स्थूल चिंतन है, तो कोई सारी उम्र परमात्म पथ की खोज में बिता देता है, हमारे विचार भी एक से नहीं हैं, जीवन में धन, सम्मान, पदवी का अहंकार और रोग, दुःख व मृत्यु के सामने सब बेकार, हम कौन है? कहाँ से आये हैं? कहाँ जायेंगे? क्या हम सचमुच अकेले हैं? इतनी बड़ी दुनिया क्यों है? कोई अदृश्य सत्ता होती है क्या? ये समय क्या है? क्या बुद्धिवादी होना अच्छा है या हृदयवादी? संसार से मुक्ति क्या संभव है? यदि है तो वो मुक्ति क्या है? मायाजाल क्या है? ऐसे न जाने कितने रहस्य हैं जिनको विज्ञान भी सुलझाने चला है और इंसान भी, सदियों से प्रयास हो रहे हैं, लेकिन कौलान्तक पीठ इन सब बातों का शब्दों में जबाब देने कि बजाये आपको साधना का मार्ग और भीतर का सूत्र देता है, यही सूत्र सारे रहस्यों पर से पर्दा उठा सकते हैं, कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्र नाथ जी महाराज को इन रहस्यों का सम्राट कहा जाता है, सिद्ध योगियों की गूढ़ परम्परा में रहस्यों का भंडार भरा हुआ है, जिनको समझाना बड़ा जटिल है लेकिन असम्भव नहीं, इन रहस्यों के कारण जहाँ हिमालय के योगी विश्वप्रसिद्ध हुए, वहीं उन पर काल्पनिक संसार रचाने का मनघडंत आरोप भी नास्तिकों नें कई सौ सालों पहले ही जड़ दिया,किन्तु महायोगी तर्क-वितर्क में नहीं पड़ते उनका कहना है कि " जैसे मीठे पदार्थ की मीठास की व्याख्य नहीं हो सकती वैसे ही रहस्यों की रहस्यमयता की व्याख्य नहीं बल्कि केवल अनुभूति हो सकती है ।"
    Love
    Yay
    7
    1 Commentaires 0 Parts 402 Vue 0 Aperçu
  • ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन

    ६) मेरे वचनों पर श्रद्धा रख, अपने ईश्वर को सदा पुकारते रहना। क्योंकि मैंने उसका स्नेह पुकारने के कारण पाया और अब वो तुम्हारी ओर देखते है।
    ईशपुत्र-कौलान्तक नाथ के दिव्य वचन ६) मेरे वचनों पर श्रद्धा रख, अपने ईश्वर को सदा पुकारते रहना। क्योंकि मैंने उसका स्नेह पुकारने के कारण पाया और अब वो तुम्हारी ओर देखते है।
    Love
    Yay
    6
    1 Commentaires 1 Parts 446 Vue 0 Aperçu
  • ५) ब्रह्माण्ड और संसार को नाश (कयामत) के लिए उत्तपन्न नहीं किया गया है। ये तो ईश्वर नें अपने और तुम्हारे विलास के लिए बनाया है। युक्ति से यहाँ जीना, आदर्श वचनों और जीवन आचरण को ही जीने की रीति जानना। तब तुम्हारे लिए ब्रह्माण्ड के द्वार भी खोल दिए जायेंगे। प्रलय तो केवल एक महाविश्राम है।
    ५) ब्रह्माण्ड और संसार को नाश (कयामत) के लिए उत्तपन्न नहीं किया गया है। ये तो ईश्वर नें अपने और तुम्हारे विलास के लिए बनाया है। युक्ति से यहाँ जीना, आदर्श वचनों और जीवन आचरण को ही जीने की रीति जानना। तब तुम्हारे लिए ब्रह्माण्ड के द्वार भी खोल दिए जायेंगे। प्रलय तो केवल एक महाविश्राम है।
    Love
    Yay
    9
    2 Commentaires 0 Parts 483 Vue 0 Aperçu
Plus de lecture