• धधक रही है ज्वाला
    हाथों में ले कर भाला
    चहुँ ओर कलियुग काला
    ईशपुत्र भैरव तू जाग
    चीर अँधेरा कर उजियाला!
    धधक रही है ज्वाला
    धधक रही है ज्वाला

    रण के हाथी घोड़े छोड़
    विकृत हृदय के बंध तोड़
    मानव को झकझोर
    मचा धर्म का शोर
    हाहाकारी भैरव जाग
    कुचल विधर्मी नाग
    षड़यंत्रों को तोड़
    मृत्यु भय को छोड़
    किसी से न डर
    युद्ध कर युद्ध कर
    दबोच कलियुग काला
    धधक रही है ज्वाला
    हाथों में ले कर भाला
    चहुँ ओर कलियुग काला
    ईशपुत्र भैरव तू जाग
    चीर अँधेरा कर उजियाला!
    धधक रही है ज्वाला
    धधक रही है ज्वाला
    -Yogini R Nath

    #Ishaputra #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendraNath #IshaputraBhajan #HimalayanMahasiddha #SiddhaDharma #KulantNath #KaulantakNath #iloveishaputra #scrolllink
    धधक रही है ज्वाला हाथों में ले कर भाला चहुँ ओर कलियुग काला ईशपुत्र भैरव तू जाग चीर अँधेरा कर उजियाला! धधक रही है ज्वाला धधक रही है ज्वाला रण के हाथी घोड़े छोड़ विकृत हृदय के बंध तोड़ मानव को झकझोर मचा धर्म का शोर हाहाकारी भैरव जाग कुचल विधर्मी नाग षड़यंत्रों को तोड़ मृत्यु भय को छोड़ किसी से न डर युद्ध कर युद्ध कर दबोच कलियुग काला धधक रही है ज्वाला हाथों में ले कर भाला चहुँ ओर कलियुग काला ईशपुत्र भैरव तू जाग चीर अँधेरा कर उजियाला! धधक रही है ज्वाला धधक रही है ज्वाला -Yogini R Nath #Ishaputra #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendraNath #IshaputraBhajan #HimalayanMahasiddha #SiddhaDharma #KulantNath #KaulantakNath #iloveishaputra #scrolllink
    Love
    Yay
    Like
    wow
    11
    4 Kommentare 3 Geteilt 3KB Ansichten 0 Bewertungen
  • Pink Flower of the day
    Pink Flower of the day 🌸
    Love
    Like
    3
    0 Kommentare 0 Geteilt 251 Ansichten 0 Bewertungen
  • नाद एव ध्यानस्य परमं साधनम् ।
    नाद एव ध्यानस्य परमं साधनम् ।
    Love
    2
    1 Kommentare 0 Geteilt 256 Ansichten 0 Bewertungen
  • Like
    Love
    4
    1 Kommentare 0 Geteilt 231 Ansichten 0 Bewertungen
  • Like
    Love
    5
    1 Kommentare 0 Geteilt 173 Ansichten 0 Bewertungen
  • ॥ अथ श्री कौलान्तक नाथ स्तुतिः ॥

    नित्यं सिद्धेश्वरं, महारहस्यकारणं, योगिजन वंदितं । प्रचण्डचंडरुपिणं शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥

    त्वं विराटातिविराटं, त्वं कौतुकानन्द स्वरूपं । रागलयादिकरणं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥

    ईशपुत्रोत्वं. परिपूर्णरूपं, सकल अवतारादि वंदितं ।

    शिखरपुरुषोनमस्तुभ्यं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥


    अघोरेश्वरं, ब्रह्माण्डरूपं, पापादि बंध मोचनं । सर्वकलाधारिणे, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥

    महाहिमालयेश्वरं, आनन्द रासादिकारणं । भक्तानन्द प्रदायकं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥

    सर्वदा सर्वकुलनायकं, सर्व सिद्धिप्रदायकं । अक्षरपुरुष, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥

    अप्सरादिवंदितं, भैरवीकुलनायकं । ममप्रेमकरणं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ।

    ॥ इति श्री महाभैरवी मृगाक्षी कृत श्री कौलान्तक नाथ महास्तुतिः सम्पूर्ण ॥
    ॥ अथ श्री कौलान्तक नाथ स्तुतिः ॥ नित्यं सिद्धेश्वरं, महारहस्यकारणं, योगिजन वंदितं । प्रचण्डचंडरुपिणं शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥ त्वं विराटातिविराटं, त्वं कौतुकानन्द स्वरूपं । रागलयादिकरणं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥ ईशपुत्रोत्वं. परिपूर्णरूपं, सकल अवतारादि वंदितं । शिखरपुरुषोनमस्तुभ्यं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥ अघोरेश्वरं, ब्रह्माण्डरूपं, पापादि बंध मोचनं । सर्वकलाधारिणे, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥ महाहिमालयेश्वरं, आनन्द रासादिकारणं । भक्तानन्द प्रदायकं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥ सर्वदा सर्वकुलनायकं, सर्व सिद्धिप्रदायकं । अक्षरपुरुष, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥ अप्सरादिवंदितं, भैरवीकुलनायकं । ममप्रेमकरणं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं । ॥ इति श्री महाभैरवी मृगाक्षी कृत श्री कौलान्तक नाथ महास्तुतिः सम्पूर्ण ॥
    Love
    Yay
    4
    2 Kommentare 2 Geteilt 929 Ansichten 0 Bewertungen
  • Like
    Haha
    3
    0 Kommentare 0 Geteilt 396 Ansichten 0 Bewertungen
  • ॥ अथ श्री कौलान्तक नाथ स्तुतिः ॥

    नित्यं सिद्धेश्वरं, महारहस्यकारणं, योगिजन वंदितं । प्रचण्डचंडरुपिणं शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥

    त्वं विराटातिविराटं, त्वं कौतुकानन्द स्वरूपं । रागलयादिकरणं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥

    ईशपुत्रोत्वं. परिपूर्णरूपं, सकल अवतारादि वंदितं ।

    शिखरपुरुषोनमस्तुभ्यं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥


    अघोरेश्वरं, ब्रह्माण्डरूपं, पापादि बंध मोचनं । सर्वकलाधारिणे, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥

    महाहिमालयेश्वरं, आनन्द रासादिकारणं । भक्तानन्द प्रदायकं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥

    सर्वदा सर्वकुलनायकं, सर्व सिद्धिप्रदायकं । अक्षरपुरुष, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ॥

    अप्सरादिवंदितं, भैरवीकुलनायकं । ममप्रेमकरणं, शिवांशरूपं प्रणम्यं सदैवं ।

    ॥ इति श्री महाभैरवी मृगाक्षी कृत श्री कौलान्तक नाथ महास्तुतिः सम्पूर्ण ॥
    Love
    4
    0 Kommentare 0 Geteilt 283 Ansichten 0 Bewertungen
  • Every storm has two purposes

    #nostalgia #scrolllink
    Every storm has two purposes #nostalgia #scrolllink
    Like
    Love
    2
    0 Kommentare 0 Geteilt 964 Ansichten 0 Bewertungen
  • धधक रही है ज्वाला
    हाथों में ले कर भाला
    चहुँ ओर कलियुग काला
    ईशपुत्र भैरव तू जाग
    चीर अँधेरा कर उजियाला!
    धधक रही है ज्वाला
    धधक रही है ज्वाला

    रण के हाथी घोड़े छोड़
    विकृत हृदय के बंध तोड़
    मानव को झकझोर
    मचा धर्म का शोर
    हाहाकारी भैरव जाग
    कुचल विधर्मी नाग
    षड़यंत्रों को तोड़
    मृत्यु भय को छोड़
    किसी से न डर
    युद्ध कर युद्ध कर
    दबोच कलियुग काला
    धधक रही है ज्वाला
    हाथों में ले कर भाला
    चहुँ ओर कलियुग काला
    ईशपुत्र भैरव तू जाग
    चीर अँधेरा कर उजियाला!
    धधक रही है ज्वाला
    धधक रही है ज्वाला
    -Yogini R Nath

    #Ishaputra #MahasiddhaIshaputra #MahayogiSatyendraNath #IshaputraBhajan #HimalayanMahasiddha #SiddhaDharma #KulantNath #KaulantakNath #iloveishaputra #scrolllink
    Love
    4
    0 Kommentare 0 Geteilt 303 Ansichten 0 Bewertungen