Recent Updates
  • अब आते है मेरे हिमाचल मेरे भगवान के पास..इन्तेज़ार ख़त्म....
    अब आते है मेरे हिमाचल मेरे भगवान के पास..इन्तेज़ार ख़त्म....
    Love
    1
    0 Comments 0 Shares 460 Views 0 Reviews
  • Hahaha
    Hahaha
    Like
    2
    0 Comments 0 Shares 278 Views 0 Reviews
  • Like
    1
    0 Comments 0 Shares 278 Views 0 Reviews
  • सागर और मै
    सागर और मै
    0 Comments 0 Shares 328 Views 0 Reviews
  • Chill
    Chill
    Like
    Love
    7
    3 Comments 0 Shares 303 Views 0 Reviews
  • सऊदी अरब के सबसे उम्रदराज व्यक्ति, नासिर बिन रादान अल-रशीद अल-वदाई का 142 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

    1884 में जन्मे नासिर की सात बेगमें थीं और उनके परिवार में बच्चों और नाती-पोतों सहित कुल 134 सदस्य थे।

    उन्होंने आखिरी निकाह 110 वर्ष की आयु में 29 वर्षीय युवती से की थी और 130 वर्ष की आयु में दोबारा निकाह करने की इच्छा जाहिर की थी ।
    सऊदी अरब के सबसे उम्रदराज व्यक्ति, नासिर बिन रादान अल-रशीद अल-वदाई का 142 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 1884 में जन्मे नासिर की सात बेगमें थीं और उनके परिवार में बच्चों और नाती-पोतों सहित कुल 134 सदस्य थे। उन्होंने आखिरी निकाह 110 वर्ष की आयु में 29 वर्षीय युवती से की थी और 130 वर्ष की आयु में दोबारा निकाह करने की इच्छा जाहिर की थी ।
    Like
    wow
    Angry
    3
    1 Comments 0 Shares 326 Views 1 0 Reviews
  • Like
    Haha
    2
    0 Comments 0 Shares 319 Views 5 0 Reviews
  • Baap aur beta....
    Baap aur beta....
    Love
    Like
    Yay
    4
    0 Comments 0 Shares 619 Views 0 Reviews
  • Like
    Love
    2
    0 Comments 0 Shares 319 Views 2 0 Reviews
  • सदा न संग सहेलियाँ, सदा न राजा देश।
    सदा न जुग में जीवणा, सदा न काला केश।
    सदा न फूलै केतकी, सदा न सावन होय।
    सदा न विपदा रह सके, सदा न सुख भी होय।
    सदा न मौज बसन्त री, सदा न ग्रीष्म भाण।
    सदा न जोवन थिर रहे, सदा न संपत माण।
    सदा न काहू की रही, गल प्रीतम की बांह।
    ढ़लते ढ़लते ढ़ल गई, तरवर की सी छाँह।
    सदा न संग सहेलियाँ, सदा न राजा देश। सदा न जुग में जीवणा, सदा न काला केश। सदा न फूलै केतकी, सदा न सावन होय। सदा न विपदा रह सके, सदा न सुख भी होय। सदा न मौज बसन्त री, सदा न ग्रीष्म भाण। सदा न जोवन थिर रहे, सदा न संपत माण। सदा न काहू की रही, गल प्रीतम की बांह। ढ़लते ढ़लते ढ़ल गई, तरवर की सी छाँह।
    Like
    2
    0 Comments 0 Shares 396 Views 0 Reviews
  • Like
    Love
    3
    0 Comments 0 Shares 307 Views 4 0 Reviews
  • Like
    Love
    Yay
    3
    1 Comments 0 Shares 308 Views 4 0 Reviews
More Stories